मै अहम्
लगता है की बाला साहब सठिया गए है कहा जाता है कि बुढ़ापा बहुधा बचपन का रूप होता है
और ऐसा ही कुछ कर रहे है बाला साहब पर जनाब शाहरुख़ खान भी तो कम नहीं जो पाकिस्तानी पिछले ६० साल से सर दर्द बने हुए है उन लोगो को अपनी टीम में न खेल पाने पर शोक ज़ाहिर कर रहे है और तर्क कि बात करें तो पाचों उँगलियाँ बराबर नहीं होती जो खिलाडी पाकिस्तान से आयेंगे वो तो खिलाडी है पाकिस्तानी थोड़ी है कम से कम अब तो ये झूठा अहम् छोड़ दो और देश को बाटने वाले घिनोने काम छोड़ दो
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